>
Title: Need to include Bhojpuri language in the Eighth Schedule of the constitution.
श्री शत्रुघ्न सिन्हा : थैक्यू मैडम स्पीकर। मैं आपका आभार प्रकट करता हूं कि आपने खास कारण से, कम समय की सूचना के बावजूद, मुझे खास पर्मिशन दी। मैं एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय की ओर तमाम सदन का ध्यान भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु आकर्षित करना चाहूंगा।
मैडम स्पीकर, यह मामला किसी खास पार्टी या व्यक्ति का नहीं है, यह मामलों लाखों व्यक्तियों का नहीं बल्कि करोड़ों व्यक्तियों का है। देश की प्राचीन भाषा, सुंदर भाषा, सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी भाषा भोजपुरी भाषा, जो न केवल बिहार और उत्तर प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों की है बल्कि विदेशों में भी इसका बहुत प्रभाव है। यह भाषा न सिर्फ आम लोगों की भाषा है बल्कि यह मॉरिशस के फादर ऑफ द नेशन जिन्हें कहते हैं उन सर शिवसागर रामगुलाम की भाषा है। ...( व्यवधान) भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद की भाषा है, सम्पूर्ण क्रंति के महानायक जयप्रकाश नारायाण जी की भाषा है, परम आदरणीय बाबू जगजीवन राम की भाषा है, हमारे भूतपूर्व एवं अभूतपूर्व वित्त मंत्री, यशवंत सिन्हा जी की भाषा है। किसी को राष्ट्रीय सम्पत्ति का नारा आज दिया जा सकता है तो हमारे मित्र लालू प्रसाद जी हैं, उनकी भाषा है। स्पीकर महोदया, भोजपुरी आपकी भाषा है हमारी भाषा है। फिर भी इस भाषा को अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। ...( व्यवधान) भिखारी ठाकुर की भाषा है।...( व्यवधान) करीब 20-25 करोड़ लोगों की यह भाषा है और ...( व्यवधान) आज तक सबसे मशहूर अगर कोई रोडियो नाटक हुआ है तो वह भोजपुरी नाटक “ लोहा सिंह” हुआ है। जिस लोहा सिंह का असर आज भी हमारे मित्र लालू यादव जी में कई बार दिखाई पड़ता है।
श्री लालू प्रसाद (सारण): भोजपुरी महेन्द्र मिश्र की भाषा है।
श्री शत्रुघ्न सिन्हा : महेन्द्र मिश्र की भाषा है। ऐसे-ऐसे गुणी, नामचीन और बढ़िया लोगों की भाषा है, बड़े लोगों की भाषा है। मैंने लालू यादव जी को इसलिए राष्ट्रीय सम्पत्ति कहा, जैसे नेशनल पक्षी हमारा मोर है, उसी तरह से लालू यादव जी की लोकप्रियता देश-विदेश में, पाकिस्तान में है तो मैं समझता हूं कि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ-साथ अगर लालू यादव जी को भी राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित कर दिया जाए। अभी हमने एक बहुत ही बढ़िया, लोकप्रिय प्रोग्राम भोजपुरी में किया है “ के बनी करोड़पति।” यह प्रोग्राम भोजपुरी में बहुत लोकप्रिय हुआ और खास बात उसमें यह रही कि वह प्रोग्राम जब भोजपुरी लोग देखते हैं तो उन्हें तो पसंद आता ही है लेकिन साथ ही साथ जो भोजपुरी बोल नहीं सकते हैं, उन्हें भी यह समझ में आती है। हमारे दो मैथिली के दो लोग हैं, कीर्ति आजाद जी हैं, हुक्मदेव नारायण यादव जी हैं। ...( व्यवधान)
श्री कांति लाल भूरिया (रतलाम): शत्रुघ्न सिन्हा जी की भी भाषा हैं।
श्री शत्रुघ्न सिन्हा : मैं तो आपका अपना हूं, आपका भाई हूं, आपके घर का आदमी हूं। मैं यह कह रहा हूं कि ऐसे-ऐसे लोग जो धाराप्रवाह भोजपुरी बोल नहीं सकते हैं, वह भी भोजपुरी को समझ सकते हैं।
13.00 hrs.
तमिल बहुत अच्छी भाषा है, तेलुगु अच्छी भाषा है, पंजाबी बहुत अच्छी भाषा है, बंगाली बहुत अच्छी भाषा है।...( व्यवधान) हमारे अपने जय महाराष्ट्र की मराठी भाषा बहुत अच्छी है, कन्नड़ अच्छी भाषा है। सारी भाषाएं अच्छी होती हैं। गुजराती वगैरह सब बहुत अच्छी भाषाएं हैं। हमारे यहां एक से एक बढ़कर भाषाएं हैं और बहुत सारी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है। मैथिली भाषा को भी शामिल किया गया है और सही शामिल किया गया है। मैथिली विद्वानों की भाषा है। लेकिन और भी भाषाएं जैसे बोड़ोलैंड की भाषा है, मणिपुर की भाषा है, जिन्हें अनुसूची में शामिल किया गया है, जो बहुत कम लोगों द्वारा बोली जाती हैं । मेरा कहना यह है कि जो कम लोगों द्वारा बोली जाती हैं, उन भाषाओं को भी शामिल किया गया है और सही हुआ है । लेकिन करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी, जो 25 करोड़ लोगों की भाषा है, ऐसा लोग कहते हैं, यह देश-विदेशो में भी लोकप्रिय भाषा है, लेकिन उसे आज तक संविधान की आठवी अनुसूची में शांमिल नहीं किया गया है। इसीलिए जो हमारी इतनी भोजपुरी फिल्में बन रही हैं और जिनकी तारीफ हो रही है, जिनके कारण पूरा भोजपुरी इंडस्ट्री चल रहा है, श्री संजय निरूपम, हमारे छोटे भाई उधर बैठे हैं, इन्होंने भी बहुत सहारा और सहयोग दिया है। लेकिन उन फिल्मों को आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए महत्व नहीं दिया जाता है,
अध्यक्ष महोदया : डा.िगरिजा व्यास, आप बोलिये।
श्री शत्रुघ्न सिन्हा : मैडम, मैं कंक्लूड कर रहा हूं। मैं शायद पहली बार आपके सामने बोल रहा हूं, इसलिए शायद आपके सामने सही सही नहीं बोल पा रहा हूं या फिर थोड़ा झिझक रहा हूं।
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, आप भोजपुरी का एक वाक्य बोलकर समाप्त कीजिए।
श्री शत्रुघ्न सिन्हा : मैं वही करने वाला हूं। मैं इसके बाद बंगाली पर नहीं जाऊंगा, मराठी पर नहीं जाऊंगा, मैं भोजपुरी पर रहूंगा। मैं यह कह रहा हूं कि यह करोड़ों लोगों की भाषा है और जो हमारी भोजपुरी फिल्में बाहर जाती हैं, वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ नहीं बना पाती हैं, चूंकि यह भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं है। जिस दिन भोजपुरी भाषा को यहां से संविधान की वैलिडिटी एक्सेप्टेबिलिटी, रिस्पेक्टेबिलिटी और लीगेलिटी मिलेगी तो शायद हमारी फिल्में और भोजपुरी इंडस्ट्री जो फल-फूल रहा है और तरक्की कर रहा है, यह और नये आयाम और मुकाम तक पहुंच पायेगी।
इसलिए मैं आज आपके सामने पूरे सदन का आशीर्वाद चाहता हूं कि सरकार इस ओर ध्यान दे। माननीय प्रधान मंत्री जी सामने बैठे हैं, मैं नतमस्तक होकर, नम्रतापूर्वक प्रधान मंत्री जी को प्रणाम करते हुए सरकार से अनुरोध करता हूं कि भोजपुरी भाषा को जल्द से जल्द बाकी भाषाओं की तरह संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करे। बाकी भाषाओं की तरह सारी भाषाएं अच्छी होती हैं, मां सबकी अच्छी होती है, लेकिन अपनी मां से बढ़कर नहीं हो सकती। यही कहते हुए मैं चाहूंगा कि भोजपुरी भाषा को जल्द से जल्द भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : जो भी माननीय सदस्य अपने आपको एसोसिएट करना चाहते हैं, वे सदन के सभा पटल पर अपने नाम भेज दीजिए। डा.िगरिजा व्यास, आप बोलिये।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : सर्वश्री पी.एल. पुनिया,
डा.िगरिजा व्यास,
श्री रामकिशुन,
श्री नीरज शेखर सिंह,
श्री ओम प्रकाश यादव,
श्री कीर्ति आजाद,
श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय,
श्री गोरखनाथ पाण्डेय,
श्री संजय जायसवाल,
श्री दिलीपकुमार मनसुखलाल गांधी,
डा. प्रसन्न कुमार पाटसाणी,
श्री रमेन डेका,
श्री विश्व मोहन कुमार,
श्री राजेन्द्र अग्रवाल,
प्रो. रामशंकर,
श्री अर्जुन राम मेघवाल,
डा. किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी,
श्री बालकृष्ण खांडेराव शुक्ला,
श्रीमती पुतुल कुमारी,
श्री कमल किशोर कमांडो,
श्री निनोंग ईरींग,
श्रीमती मीना सिंह,
डा.िवनय कुमार पाण्डेय,
श्री रतन सिंह,
श्रीमती संतोष चौधरी,
श्री जगदम्बिका पाल,
श्री पी.टी. थॉमस,
डा.काकोली घोष दस्तिदार,
श्री अजय कुमार तथा
श्री शैलेन्द्र कुमार अपने आपको श्री शत्रुघ्न सिन्हा के विषय से सम्बद्ध करते हैं।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये और उन्हें बोलने दीजिए।