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Title: Regarding drought situation in Maharashtra.
श्री गोपीनाथ मुंडे (बीड): मैडम स्पीकर, मुझे बोलने का अवसर देने के लिए मैं आपका आभारी हूं।
1972 में महाराष्ट्र में जैसा सूखा था, उससे भी ज्यादा सूखे की चपेट में पूरा महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र सरकार के पास जो साधन हैं, वे इस नैचुरल कैलेमिटी को मीट आउट नहीं कर सकते, ऐसी सिचुएशन है। इस सूखे के कारण पिछले तीन महीने में 100 किसानों ने आत्महत्या की है और और भी किसानों के आत्महत्या करने की सम्भावना है। वहां के लोग जानवर कत्लखाने को बेच रहे हैं। वहां चारा, रोजगार और पीने के पानी की समस्या भयंकर हो चुकी है और वहां 100-100 किलोमीटर में पीने का पानी नहीं है। इस हालत में महाराष्ट्र में केन्द्र सरकार को सहयोग करना चाहिए और ज्यादा फाइनेंस करना चाहिए।
वहां राज्य सरकार की तरफ से भी भेदभाव हो रहा है। वहां केवल 15 जिलों में सूखे की योजना बनाई गई है, जबकि विदर्भ और मराठवाड़ा में भी 7-8 जिले ऐसे हैं, जो सूखे की चपेट में हैं। अकाल और नैचुरल कैलेमिटी में इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए, इसलिए यह योजना 23 जिलों में लागू करनी चाहिए।
मैं मांग करता हूं कि केन्द्र सरकार वहां इसके लिए अपनी टीम भेजे और सभी जिलों में क्या स्थिति है, उससे अवगत होकर किसानों को चारा, रोजगार और पीने के पानी का प्रबन्ध करने के लिए केन्द्र सरकार महाराष्ट्र सरकार को सहयोग करे और महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दे कि सूखे के मामले में राजनीति नहीं की जाये।
मेरा बीड़ डिस्ट्रिक्ट पूरा सूखे की चपेट में है, लेकिन वहां कोई भी योजना नहीं चल रही है। यह भेदभाव नहीं होना चाहिए। बीड़ जिला पूरा सूखाग्रस्त है, लेकिन उसके लिए टैंकर्स नहीं दिये जा रहे हैं, रोजगार नहीं दिया जा रहा है और मेरे जिले के लोग कर्नाटक में रोजगार के लिए स्थानान्तरित हो रहे हैं, यह स्थिति अपमानजनक है और इसके कारण वहां के किसानों में गुस्सा है, इसलिए केन्द्र सरकार इसमें सहयोग करे और सभी जिलों को और विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा को भी मदद करने के लिए केन्द्र उनको निर्देश दे।
श्री हंसराज गं. अहीर और
श्री शिवराम गौड्डा को श्री गोपीनाथ मुंडे के साथ सम्बद्ध करने की अनुमति दी जाती है।